जिले में हेल्दी लिवर  रोकथाम के लिए चलेगा हेल्दी लीवर अभियान

चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी  ने विभागीय अधिकारियों को दिए गतिविधियां संचालित करने के निर्देश

जिले में हेपेटाइटिस की रोकथाम के लिए चलेगा हेल्दी लीवर कैंपेन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने सभी विभागीय अधिकारियों को दिए गतिविधियां संचालित करने 

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी एचएल ताबियार को हेल्दी लीवर कैंपन संबंधित गतिविधियां आयोजित की जा रही है उसका प्रचार प्रसार किया जाए। उन्होंने कहा कि हेल्दी लीवर को लेकर जिलेभर में प्रचार प्रसार किया जाए। गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाए जाए। उन्होंने कहा कि इसमें सभी विभाग अपनी जिम्मेदारी के साथ काम करें।

 जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस अभियान के तहत जिले के सभी जलस़्त्रोत में साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने पंचायतीराज विभाग को भी निर्देश दिए कि उनके अधीन आने वाले जलस़्त्रोत की सफाई करवाई जाए। जिसकी जिम्मेदारी सभी विकास अधिकारियों और ग्रामीण विकास अधिकारियों को दी जाए। साथ ही जिला जेल में हेपेटाइटिस की स्क्रीनिंग करने के निर्देश दिए।  डॉक्टर दीपक ने सभी स्कूलों में निबंध व क्वीज प्रतियोगिताएं आदि आयोजित करने के निर्देश दिए।डीपीओ डॉ हेमलता जैन ने 28 जुलाई तक चलने वाली अभियान की रूपरेखा बताई। उन्होंने बताया कि जिलास्तर से ब्लॉकस्तर तक बैठकों के माध्यम से कैंपेन की जानकारी दी जा रही है। साथ ही इस दौरान रैलियों का  आयोजन भी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि हेल्दी लीवर अभियान के माध्यम से आमजन से शुद्ध पानी पीने और स्वच्छ भोजन के साथ शराब और तंबाकू छोड़ने की अपील की जाएगी।ताकी गांव-गांव में इस अभियान के तहत हेल्दी लीवर का संदेश दिया जा सके। उन्होंने कहा कि इसमें सभी विभागों का साथ लेकर कार्य किया जाएगा। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से भी आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाली महिलाओं और बच्चों को हेल्दी लीवर के स्वच्छ और पौष्टिक भोजन का संदेश दिया जाएगा।

हेल्दी लीवर अभियान’ हुआ शुरू

डॉक्टर्स की मानें तो हेपेटाईटिस बी और सी सबसे ज्यादा खतरनाक होते हैं. पीड़ित मरीजों को लीवर सिरोसिस होने की आशंका रहती है. ऐसी स्थिति में मरीजों का लीवर सिकुड़कर काम करना बंद कर देता है. कई बार लीवर में पानी भर जाता है, खून की उल्टियां होने लगती हैं और शरीर पर सूजन आ जाता है. मरीज को लीवर कैंसर होने की आशंका बढ़ जाती है. ऐसे में संक्रामक बीमारी से बचाव ही सबसे कारगर उपाय है. बचने के लिए इंजेक्शन, रेजर्स या टूथब्रश दूसरे से साझा न करें. असुरक्षित यौन संबंध और दूषित खानपान से बचें. बच्चों को हेपेटाईटिस के टीके जरूर लगवाएं. गर्भवती महिलाओं का हेपेटाईटिस बी और सी टेस्ट करवाएं. खुली चोट को छूने से पहले हाथ अच्छी तरह साफ कर लें. 

हेपेटाईटिस के कारण और प्रकार

डॉक्टर  हेमलता जैन ने बताया कि दूसरे का टूथब्रश और शेविंग रेजर इस्तेमाल करना, सिरिंज या सर्जरी के उपकरणों का बिना स्ट्रलाइजेशन इस्तेमाल करना, इंजेक्शन से किसी प्रकार का नशा करना, असुरक्षित तरीके से यौन संबंध बनाना, गलत तरीके से खून देना या चढ़वाना और दूषित खानपान हेपेटाईटिस बीमारी के मुख्य कारण हैं. डॉ दिपक निमा ने बताया कि वायरल हेपेटाईटिस पांच प्रकार के होते हैं. हेपेटाईटिस ए, बी, सी, डी और ई होता है. हेपेटाईटिस ए और ई दूषित पानी, भोजन के कारण होता है. हेपेटाईटिस बी, सी और डी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से होते हैं.

हेपेटाईटिस ए और ई अपेक्षाकृत कम खतरनाक होते हैं. हेपेटाईटिस बी, सी और डी लीवर को नुकसान पहुंचाते हैं. लक्षणों में भूख न लगना, जी मिचलाना और पेट में दर्द, आंखों में पीलापन, थकान और तेजी से वजन कम होना, पाचन संबंधी समस्या, उल्टियां आना, पैरों में सूजन, सिर में दर्द, हल्का बुखार रहना और यूरिन का कलर पीला होना है. उन्होंने कहा कि वायरस का पता लगाने के लिए लीवर फंक्शन टेस्ट, एंटीजन और एंटीबॉडीज टेस्ट कराना चाहिए.

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