राष्ट्रपति मुर्मू के शपथग्रहण समारोह से CM नीतीश की दूरी के क्या है मायनें!

जानें क्या हैं राष्ट्रपति की शक्तियां और अधिकार, कितनी मिलती है वेतन और सुविधाएं

द्रोपदी मुर्मु देश की 15वीं राष्ट्रपति बन गई हैं। द्रौपदी मुर्मू आजादी के बाद पैदा होने वाली पहली और शीर्ष पद पर काबिज होने वाली सबसे कम उम्र की शख्सियत बन गई हैं। प्रतिभा पाटिल के बाद मुर्मु देश की दूसरी महिला और प्रथम आदिवासी महिला राष्ट्रपति हैं। राष्ट्रपति बनने के बाद द्रौपदी मुर्मु के साथ कई शक्तियां और अधिकार भी स्वत: आ गए हैं, आइए जानते हैं क्या है राष्ट्रपति की शक्तियां- अधिकार और कितने दिन का होता है कार्यकाल।

राष्ट्रपति की सैलरी व भत्ते

राष्ट्रपति की सैलरी 5 लाख प्रतिमाह है, राष्ट्रपति के वेतन पर कोई टैक्स नहीं लगता है। इसके अलावा   आजीवन मुफ्त चिकित्सा सुविधाएं, आवास व संसद द्वारा स्वीकृत अन्य भत्ते प्राप्त होते हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 59 के अनुसार, राष्ट्रपति के कार्यकाल के दौरान सैलरी तथा भत्ते में किसी प्रकार की कमी नहीं की जा सकती है।

राष्ट्रपति की शक्तियां एवं अधिकार

भारत के राष्ट्रपति की कई प्रकार की शक्तियां एवं अधिकार होते हैं जैसे-

कार्यपालिका शक्ति 

इसके तहत राष्ट्रपति कई पदों पर नियुक्ति करने का अधिकार होता है।

-प्रधानमंत्री के सलाहकार मंत्रीपरिषद के अन्य सदस्य

-सर्वोच्च एवं उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश

-भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक

-भारत के महान्यायवादी

-राज्यों के राज्यपाल

-मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्त

-संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों

-वित्त आयोग, भाषा आयोग, पिछड़ा वर्ग आयोग, राष्ट्रीय महिला आयोग, मानवाधिकार आयोग, अल्पसंख्यक आयोग एवं अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन के संबंध में रिपोर्ट देने वाले आयोग के सदस्यों को नियुक्त करने का अधिकार होता है।

विधायी शक्तियां

राष्ट्रपति लोकसभा के प्रथम सत्र को संबोधित करते हैं व संयुक्त अधिवेशन बुलाकर भाषण देने की शक्तियां भी प्राप्त है। राष्ट्रपति को संसद सत्र आहूत, सत्रावसान करना एवं लोकसभा को भंग करने की शक्ति भी रखता है। नए राज्यों के निर्माण राज्य की सीमा में परिवर्तन संबंधित विधेयक, धन विधेयक या संचित निधि से व्यय करने वाला विधेयक एवं राज्य हित से जुड़े विधेयक बिना राष्ट्रपति के पूर्व अनुमति के संसद में प्रस्तुत नहीं होते हैं। राष्ट्रपति लोकसभा के लिए आंग्ल भारतीय समुदाय से 2 सदस्य तथा राज्यसभा के लिए कला, साहित्य, विज्ञान, समाज सेवा क्षेत्र के 12 सदस्यों को मनोनीत करने का शक्तियां प्राप्त है।

न्यायिक शक्तियां

राष्ट्रपति को किसी अपराधी को सजा को क्षमा करने, उसका प्रविलंवन करने, संशोधन और सजा कम करने का अधिकार प्राप्त है। राष्ट्रपति को मृत्युदंड माफ करने का भी अधिकार प्राप्त है। राष्ट्रपति, सजा या कोर्ट मार्शल की सजा को माफ कर सकता है।

राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियां

भारत के राष्ट्रपति के पास सैन्य बलों की सर्वोच्च कमांडर होता है। राष्ट्रपति को युद्ध और शांति की घोषणा करने तथा सैन्य बलों को विस्तार करने हेतु आदेश देने की शक्ति प्राप्त है।

आपातकालीन शक्तियां

भारतीय संविधान में राष्ट्रपति को तीन स्थितियों में आपातकालीन शक्तियां प्राप्त है-

–अनुच्छेद 352 – देश में युद्ध बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह की स्थिति में राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि पूरे भारत या किसी एक भाग की सुरक्षा खतरे में है, तो वह पूरे भारत या किसी भाग में आपातकाल घोषणा कर सकता है। हालांकि अगर यह 1 माह के बाद संसद से अनुमोदित ना हो, तो स्वत: समाप्त हो जाती है। इस तरह की घोषणा को संसद के दो तिहाई बहुमत से पास होना आवश्यक होता है।

–अनुच्छेद 356- इसके अंतर्गत यदि कोई राज्य सरकार संवैधानिक नियमों के अनुरूप कार्य नहीं कर रही है, तो वहां राष्ट्रपति शासन लगा सकता है। इसे संसद द्वारा 2 माह के भीतर अनुमोदन करना आवश्यक होता है।

–अनुच्छेद 360- अनुच्छेद 360 के अंतर्गत देश में आर्थिक संकट की स्थिति में राष्ट्रपति अपनी विशिष्ट शक्तियों का प्रयोग कर वित्तीय आपात की घोषणा कर सकता है।

राष्ट्रपति की विटों शक्तियां

पूर्व वीटो

इस वीटो शक्ति के तहत राष्ट्रपति किसी विधेयक पर अपनी अनुमति नहीं देता है, अर्थात वह अपनी अनुमति को सुरक्षित रख सकता है।

निलंबित वीटो

इस वीटो शक्ति के अंतर्गत राष्ट्रपति किसी विधेयक को संसद के पास पुनर्विचार हेतु भेज सकता है।

पॉकेट वीटो

इस वीटो शक्ति के तहत राष्ट्रपति  किसी विधेयक पर न अनुमति देता है, न ही अनुमति देने से इनकार करता है और न ही पुनर्विचार हेतु संसद के पास भेजता है। यानि किसी विधेयक को अनिश्चितकाल के लिए अपने पास सुरक्षित रख सकता है।

राष्ट्रपति का कार्यकाल 

देश के राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्षों का होता है, हालांकि राष्ट्रपति अपने पद पर तबतक बना रहेगा, जबतक की उसका उत्तराधिकारी पद ग्रहण नहीं कर लेता। अगर राष्ट्रपति का पद मृत्यु, त्याग पत्र या महाभियोग की वजह से खाली हो जाता है, तो इस स्थिति में नए राष्ट्रपति का चुनाव 5 वर्षों के लिए ही होता है, ना कि शेष अवधि के लिए। इसके अलावा खाली पद पर चुनाव 6 महीने के भीतर कराया जाता है। वैसे अगर राष्ट्रपति का पद मृत्यु त्याग पत्र अथवा पद से हटाए जाने के कारण रिक्त होता है, तो उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है


आज देश को द्रौपदी मुर्मू के रूप में पंद्रहवां राष्ट्रपति मिल गया है. अमूनन जैसा होता है वैसा ही आज द्रौपदी मुर्मू को भारत के प्रधान न्यायधीश एन.वी. रमना ने राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाईआज देश को द्रौपदी मुर्मू के रूप में पंद्रहवां राष्ट्रपति मिल गया है. अमूनन जैता होता है वैसा ही आज द्रौपदी मुर्मू को भारत के प्रधान न्यायधीश एन.वी. रमना ने राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई. इस मौके पर लगभग एनडीए (NDA) के सभी मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद व तमाम शीर्ष नेता मौजूद रहे लेकिन अगर कुछ खटका तो बिहार में एनडीए की सहयोगी पार्टी जेडीयू के ‘मालिक’ और बिहार के सीएम नीतीश कुमार की गैर मौजूदगी.यह बात किसी से छिपी नहीं है कि इस समय बिहार के सीएम नीतीश कुमार ‘दो नांव’ पर यात्रा कर रहे हैं. एक तरफ वह बीजेपी को कोई भाव नहीं दे रहे हैं तो दूसरी तरफ आरजेडी पर खुद कोई कटाक्ष नहीं कर रहे हैं. शायद नीतिश कुमार को अच्छी तरह पता है जब उनकी नांव डूबेगी तो उसे सिर्फ आरजेडी ही पार लगा सकती है और ऐसा 2017 में पहले भी हो चुका है. आरेजेडी भी समय-समय पर किसी न किसी बहाने नीतीश कुमार को इस बात का एहसास करा ही देती है कि वह उनके साथ है.

आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के शपथ-ग्रहण समारोह में शामिल ना होकर बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने एक बार फिर से सियासी गलियारों में गर्माहट ला दी है. सियासी जानकार इसके कई मायने निकाल रहे हैं. पहला तो यह कि नीतीश कुमार पूरी तरह से एनडीए के प्रति समर्पित नहीं हैं और दूसरा यह कि एनडीए के कार्यक्रम को नीतीश कुमार तरजीह नहीं देते यानि उन्हें जो सही लगता है वह वही करते हैं. राष्ट्रपति मुर्मू के शपथग्रहण समारोह में सीएम नीतीश कुमार की गैरमौजूदगी के पीछे ये हवाला दिया गया है कि वह पटना में एक मीटिंग में शिरकत करने वाले थे और इसलिए ही वह राष्ट्रपति के शपथग्रहण समारोह में नहीं शामिल हुए.

पांच साल में एक बार देश को नया राष्ट्रपति मिलता है. ऐसे में पटना में होने वाली मीटिंग को सीएम नीतीश कुमार टाल सकते थे, उस मीटिंग को बाद में भी रखी जा सकती थी लेकिन नीतीश कुमार ने मीटिंग को राष्ट्रपति के शपथग्रहण समारोह में शामिल होने से ज्यादा तवज्जो दिया. मीटिंग भी कोई ऐसी नहीं थी कि बिहार पर कोई राजनीतिक संकट आया रहा हो, प्राकृतिक संकट या दैवी रही हो कि मीटिंग करना अनिवार्य था, बावजूद इसके एक छोटी सी मीटिंग के लिए राष्ट्रपति के शपथ-ग्रहण समारोह में सीएम नीतीश कुमार का शिरकत ना करना इस तरफ इशारा कर रहा है कि एनडीए में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है.

बिहार आरजेडी अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने सीएम नीतीश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के शपथग्रहण समारोह में शिरकत न करने को लेकर कटाक्ष किया है. उन्होंने कहा,”मैं तो बार-बार कहता हूं ये बेमेल शादी है. कहावत है न… बेमेल शादी कपारे पर सिंदूर…. किस बात का मेल है. यदि उनके साथ नीतीश मिल गए हों, सारे सिद्धांतों के साथ, तो समाजवाद से अलग जा चुके हैं. तब कुर्सी की लड़ाई है इनकी”

वहीं, आरजेडी (RJD) के प्रवक्ता प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने भी हमला किया था. उन्होंने कहा था कि लगातार बीजेपी के नेता गृह विभाग को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमलावर नजर आते हैं. ऐसे में सब कुछ सामने दिखता है और जो कुछ दिख रहा है उससे सब स्थिति स्पष्ट है. कारण क्या है ये तो जदयू के लोग ही बताएंगे लेकिन राष्ट्रपति के शपथग्रहण समारोह में नीतीश कुमार का भाग नहीं लेना एक सवाल जरूर है जिसे विपक्ष जानना चाहता है. आखिर एनडीए के बड़े नेता कहे जानेवाले मुख्यमंत्री नीतीश इस समारोह से दूर क्यों रहे.

हालांकि जदयू संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने इस पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का शपथग्रहण मात्र एक औपचारिकता है और उसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शामिल नहीं हुए यह कोई चर्चा का विषय नहीं है. मुख्यमंत्री के पास और भी अनेक काम होते हैं. वहीं, दूसरी तरफ बीजेपी ने आरजेडी पर हमला किया है. बीजेपी प्रवक्ता रामसागर सिंह ने कहा, ‘तेजस्वी यादव को जनता ने विपक्ष में बैठने का वोट दिया है. आरजेडी दिवास्वप्न देख रही है लेकिन दिवास्वप्न कभी पूरा होता नहीं है. आरजेडी नेताओं के बयान से उनकी ही जग हंसाई हो रही है. बिहार में एनडीए सरकार विकास के कार्य में लगी है.

वहीं, दूसरी तरफ 30 जुलाई को दो दिवसीय दौरे पर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा बिहार पहुंच रहे हैं. लगभग 12 वर्ष बाद बीजेपी इतना बड़ा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक करने जा रही है. दो दिवसीय तक चलने वाले बीजेपी की बैठक में देशभर से बीजेपी के प्रमुख इकाइयों के अध्यक्ष व पदाधिकारी आएंगे. लगभग 750 बीजेपी के पदाधिकारियों के मीटिंग में शामिल होने की खबर है. बीजेपी कहीं न कहीं यह बताने का प्रयास कर रही है कि वह आगामी बिहार विधानसभा चुनाव अकेले लड़ सकती है.

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