कारगिल युद्ध के हीरो युद्धपोत ‘अजय’ ने 32 साल की देश सेवा, रोंगटे खड़े कर देगी इसकी शौर्यगाथा

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September 20, 

भारतीय सेना की शौर्यगाथा में कारगिल का युद्ध हमेशा अलग छाप रहा है। भारतीय सेना ने अपनी सूझ-बुझ और पराक्रम के बल पर पाकिस्तानी सेना को तिनके की तरह चंद दिनों में उड़ा दिया था। जहां कारगिल का युद्ध भारतीय सेना के पराक्रम के लिए स्वर्णिम आक्षरों में दर्ज है, वहीं इस युद्ध में शामिल अनेकों लड़ाकू विमानों सहित युद्धपोत की भी अहम भूमिका रही थी। इतिहास की इस गौरव गाथा को समेटे ऐसा ही एक युद्धपोत है जिसका नाम ‘अजय’ है। कारगिल युद्ध के इस हीरो युद्धपोत ‘अजय’ की बात यहां इसलिए की जा रही है क्योंकि 32 साल की शानदार सेवा के बाद सोमवार को इसे सेवामुक्त कर दिया गया।

शानदार रही 32 साल की सेवा

आईएनएस अजय को राष्ट्र को 32 साल की शानदार सेवा प्रदान करने के बाद 19 सितंबर 22 को सेवामुक्त कर दिया गया था। यह समारोह पारंपरिक तरीके से मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में आयोजित किया गया था, जिसमें राष्ट्रीय ध्वज, नौसैनिक पताका और जहाज के डीकमिशनिंग पेनेंट को आखिरी बार सूर्यास्त के समय उतारा गया था, जो जहाज की कमीशन सेवा के अंत का प्रतीक था। युद्धपोत ‘अजय’ के डीकमीशनिंग कार्यक्रम में कमीशनिंग कमांडिंग ऑफिसर वाइस एडमिरल एजी थपलियाल (सेवानिवृत्त), विशिष्ट अतिथि थे। समारोह की अध्यक्षता पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल अजेंद्र बहादुर सिंह ने की।

इस समारोह में 400 से अधिक कर्मियों ने भाग लिया जिनमें फ्लैग ऑफिसर, सेना, आईएएफ और सीजी के वरिष्ठ अधिकारी, कमीशनिंग क्रू के अधिकारी और पुरुष, पिछले कमीशन के चालक दल के साथ-साथ जहाजों के चालक दल मौजूद थे। मुख्य अतिथि कमांडिंग ऑफिसर वाइस एडमिरल ए.जी. थपलियाल ने समारोह में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए पोत द्वारा प्रदान की गई अमूल्य सेवा के बारे में विस्तार से चर्चा की।

ऑपरेशन तलवार और ऑपरेशन पराक्रम में रहा शामिल

युद्धपोत ‘अजय’ ने अपनी 32 साल की सेवा के दौरान कई मोर्चों पर भारतीय सेना के साथ जांबाजी दिखाई। अपने नाम को परिभाषित करता भारतीय नौसेना का यह युद्धपोत पराक्रम और शौर्य के लिए जाना जाता है। कारगिल युद्ध के दौरान इस युद्धपोत ने ऑपरेशन तलवार और 2001 में ऑपरेशन पराक्रम सहित कई नौसैनिक अभियानों में भाग लिया। इसके अलावा भारतीय नौसेना के कई नौसैनिक अभियानों में भाग लिया। 2017 में उरी हमले के बाद जहाज को समुद्री सीमा की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया था।

1990 में हुआ था कमीशन

आईएनएस अजय (पी-34) को 24 जनवरी, 1990 को तत्कालीन यूएसएसआर में पोटी, जॉर्जिया में कमीशन किया गया था। यह युद्धपोत महाराष्ट्र नेवल एरिया के संचालन नियंत्रण के तहत 23वें पेट्रोल वेसल स्क्वाड्रन का हिस्सा था। जहाज ने 32 से अधिक वर्षों से सक्रिय नौसैनिक सेवा में अपनी शानदार यात्रा के दौरान कारगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन तलवार और भारत-पाकिस्तान गतिरोध के दौरान 2001-2002 में ऑपरेशन पराक्रम अपनी क्षमता साबित 

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